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अनुकंपा नौकरी पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, एक से ज्यादा दावेदार हों तो बड़े बच्चे को वरीयता

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी मृत सरकारी कर्मचारी के एक से अधिक पात्र बच्चे अनुकंपा नियुक्ति के लिए दावा करते हैं, तो उम्र और वरिष्ठता के आधार पर बड़े बच्चे के दावे को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। हालांकि, केवल उम्र में बड़ा होना पर्याप्त नहीं है, संबंधित बच्चे को नियुक्ति के लिए तय सभी पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी।

छोटे बेटे को मिली नियुक्ति रद्द

मामला मुंगेली जिले का है। सरकारी स्कूल में चपरासी के पद पर कार्यरत ईश्वर सिंह क्षत्रिय की सितंबर 2016 में मृत्यु हो गई थी। उनके दो बेटे पहली पत्नी से जितेंद्र सिंह क्षत्रिय और दूसरी पत्नी से राजकुमार—ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। जिला शिक्षा अधिकारी ने 7 अगस्त 2019 को छोटे बेटे राजकुमार को नियुक्ति दे दी थी। इसके खिलाफ बड़े बेटे जितेंद्र ने हाई कोर्ट का रुख किया। जस्टिस संजय के. अग्रवाल की पीठ ने छोटे बेटे को दी गई नियुक्ति का आदेश रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि जब एक से अधिक पात्र संतान अनुकंपा नियुक्ति का दावा करें तो वरिष्ठता यानी उम्र में बड़े बच्चे के दावे पर पहले विचार किया जाना चाहिए। कोर्ट ने मामले को जिला शिक्षा अधिकारी के पास वापस भेजते हुए बड़े बेटे की पात्रता की जांच कर 30 दिनों के भीतर उसके दावे पर फैसला लेने का निर्देश दिया।

दूसरी पत्नी से जन्मे बच्चे के अधिकार पर भी टिप्पणी

हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दूसरी पत्नी से जन्मा बच्चा कानूनी वारिस हो सकता है और केवल इस आधार पर उसे अनुकंपा नियुक्ति से बाहर नहीं किया जा सकता। हालांकि, जब एक से अधिक पात्र दावेदार सामने हों, तो उनके बीच प्राथमिकता तय करने के लिए वरिष्ठता का सिद्धांत लागू किया जा सकता है।

अनुकंपा नियुक्ति में बड़े बच्चे को प्राथमिकता – हाई कोर्ट

हाई कोर्ट ने मुंगेली जिले के एक मामले में छोटे बेटे को दी गई अनुकंपा नियुक्ति का आदेश रद्द करते हुए मामला जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को वापस भेज दिया. कोर्ट ने निर्देश दिया कि पात्रता की जांच के बाद बड़े बेटे के दावे पर 30 दिनों के भीतर विचार किया जाए.

क्या है पूरा मामला?

  • यह पूरा मामला मुंगेली के धर्मपुरा स्थित सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल में चपरासी के पद पर कार्यरत ईश्वर सिंह क्षत्रिय का 29 सितंबर 2016 को निधन हो गया था. उनकी दो पत्नियां थीं.
  • ईश्वर की पहली पत्नी से जन्मे 35 वर्षीय जितेंद्र सिंह क्षत्रिय और दूसरी पत्नी से जन्मे राजकुमार, दोनों ने इस नौकरी के लिए आवेदन दिया था.
  • डीईओ ने सात अगस्त 2019 को नौकरी लिए राजकुमार को चुना, जिसके बाद जितेंद्र ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

दूसरी पत्नी का बच्चा भी होता है वैद्य

वहीं, कोर्ट ने पाया कि हालांकि दूसरी शादी से पैदा हुआ बच्चा आश्रित रोजगार लाभों के लिए वैद्य उत्तराधिकारी होता है, लेकिन राज्य सरकार दे दिशा-निर्देश कई भाई-बहनों में से किसी एक को चुनने के मामले में कोई स्पष्ट बात नहीं कहते हैं.

पटना हाई कोर्ट के फैसले को बनाया आधार

पटना हाईकोर्ट द्वारा राज किशोर बनाम बिहार राज्य मामले में तय किए गए और झारखंड हाईकोर्ट द्वारा अपनाए गए उदाहरणों का कोर्ट ने हवाला दिया है. जस्टिस अग्रवाल ने कहा कि अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति का अधिकार वरीयता के अनुसार ही तय हो.

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