बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 34 वर्षीय श्रवण सूर्यवंशी की पुलिस हिरासत में मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है। साथ ही राज्य सरकार को मृतक के परिवार को अंतरिम मुआवजे के रूप में 25 लाख रुपये देने के निर्देश भी दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि हिरासत में हुई मौत एक गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले से जुड़े सभी तथ्यों की स्वतंत्र जांच की जानी चाहिए, ताकि जिम्मेदार लोगों की पहचान हो सके और न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जांच के दौरान यदि किसी पुलिस अधिकारी या अन्य संबंधित व्यक्ति की भूमिका हिरासत में हुई कथित हिंसा या मौत के लिए जिम्मेदार पाई जाती है, तो उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी मामले के सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल करे और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाले।
परिवार को अंतरिम राहत
शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ सरकार को निर्देश दिया कि श्रवण सूर्यवंशी के परिजनों को अंतरिम मुआवजे के तौर पर 25 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाए। अदालत ने इसे पीड़ित परिवार को तत्काल राहत देने की दिशा में आवश्यक कदम बताया।
न्यायिक जांच में सिर पर चोट की बात सामने आई
श्रवण की मौत के बाद जेल अधीक्षक ने 22 जनवरी 2024 को सेशन जज को पत्र लिखकर न्यायिक जांच की मांग की थी। इसके बाद मजिस्ट्रेट ने मामले की जांच शुरू की। जुलाई 2024 में न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अपनी रिपोर्ट सौंपी।
रिपोर्ट में कहा गया कि मौत किसी blunt weapon (भोथरे हथियार) से सिर में लगी चोट के बाद हुई जटिलताओं के कारण श्रवण की मौत हुई थी।
पत्नी और दो बेटियों ने हाईकोर्ट में लगाई थी याचिका
मृतक की पत्नी और दो बेटियों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका लगाकर मामले की निष्पक्ष जांच और 50 लाख रुपए मुआवजे की मांग की थी। हाईकोर्ट ने परिवार को 1 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया था, लेकिन FIR दर्ज करने या मामले की स्वतंत्र जांच का निर्देश नहीं दिया।
इसके बाद परिवार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही सुनवाई में 1 लाख रुपए के मुआवजे को मामले की गंभीरता के मुकाबले बहुत कम बताया था।
कोर्ट ने अधिकारियों की भूमिका की भी जांच के आदेश दिए
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CBI केवल युवक की मौत की परिस्थितियों की जांच नहीं करेगी, बल्कि यह भी देखेगी कि न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य के अधिकारियों ने उचित कार्रवाई क्यों नहीं की। कोर्ट ने CBI को नियमित आपराधिक केस दर्ज कर जांच करने और किसी वरिष्ठ अधिकारी को इसकी जिम्मेदारी देने का निर्देश दिया है।
DGP के जवाब पर कोर्ट ने सवाल उठाए थे
सुनवाई के दौरान राज्य के DGP ने FIR में देरी को लेकर कहा था कि न्यायिक जांच रिपोर्ट पुलिस विभाग को नहीं भेजी गई थी। इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने सवाल उठाया कि यह रिपोर्ट तो राज्य की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे के साथ पहले ही लगाई जा चुकी थी।
DGP ने यह भी कहा था कि रिपोर्ट में ऐसा कोई संज्ञेय अपराध सामने नहीं आया, जिसके आधार पर FIR जरूरी हो। इस पर कोर्ट ने राज्य की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई थी।
एक हफ्ते में CBI को सौंपना होगा पूरा रिकॉर्ड
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के DGP को निर्देश दिया है कि मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड एक सप्ताह के भीतर विशेष दूत के जरिए CBI निदेशक को सौंपे जाएं। CBI को जांच जल्द पूरी करनी है। जांच अधिकारी की रिपोर्ट 13 अक्टूबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी जाएगी।
4 हफ्ते में परिवार को मिलेंगे 25 लाख
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को आदेश दिया है कि चार सप्ताह के भीतर 25 लाख रुपए याचिकाकर्ता के बैंक खाते में जमा किए जाएं। यह राशि अंतरिम मुआवजा है। अंतिम मुआवजा कितना होगा, इसका फैसला याचिका की अंतिम सुनवाई के दौरान किया जाएगा।
कोर्ट ने यह भी माना कि मृतक परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था और उसकी मौत हिरासत के दौरान हुई हिंसा से जुड़ी थी।


















