ईरान युद्ध के बीच दुनिया भर में पेट्रोल की कीमतें लगातार में हैं। भारत में पेट्रोल की कीमत 3 रुपये बढ़ी तो खबलबली मच गई। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के विरोध में गिग वर्कर हड़ताल पर हैं। जाहिर है पेट्रोल की महंगाई का असर गिग वर्कर की कमाई पर डालेगा, तो सवाल उठता है कि किसी देश के आम आदमी को पेट्रोल भरवाने के लिए हर महीने अपनी कमाई का कितना हिस्सा खर्च करना पड़ता है।
इसी आधार पर ग्लाोबल पेट्रोल प्राइसेज डॉट कॉम द्वारा जारी “Gasoline Affordability” रिपोर्ट में दुनिया के देशों की तुलना की गई है। रिपोर्ट में यह बताया गया कि कि 40 लीटर पेट्रोल भरवाने में औसत व्यक्ति की मंथली इनकम का कितना प्रतिशत खर्च होता है। ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेज के मुताबिक उसने प्रति व्यक्ति आय के लिए विश्व बैंक से प्रति व्यक्ति GDP पर डेटा का उपयोग किया है।
अगर किसी देश में 40 लीटर पेट्रोल भरवाने में एक महीन की कमाई का 10% खर्च होता है, तो इसका मतलब है कि एक सामान्य व्यक्ति की महीने की कमाई का दसवां हिस्सा सिर्फ एक टैंक पेट्रोल भरवाने में चला जाता है। यानी अगर 20 हजार रुपये महीने कमाता है तो उसके 2000 रुपये पेट्रोल में चले जाते हैं।
म्यांमार, पाकिस्तान और नेपाल की स्थति बेहद खराब
रिपोर्ट के अनुसार भारत के पड़ोसी देशों की बात करें तो म्यांमार, पाकिस्तान और नेपाल में यह स्थित काफी बुरी है। इन देशों में 40 लीटर पेट्रोल भरवाने में लोगों की एक महीने की कमाई का 47% से लेकर 52% तक हिस्सा खर्च हो सकता है। यानी लगभग कमाई का आधा हिस्सा पेट्रोल भरवाने में ही चला जाता है। इन देशों में एक तो इनकम कम है और पेट्रोल महंगा। यही वजह है कि इन देशों में निजी वाहन चलाना आम परिवारों के लिए बड़ा आर्थिक बोझ बन जाता है।
भारत में कमाई का कितना हिस्सा पी जाता है पेट्रोल
भारत इस लिस्ट में काफी नीचे दिखाई देता है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में 40 लीटर पेट्रोल भरवाने में औसत मासिक आय का लगभग 8% से 10% तक हिस्सा खर्च हो सकता है। यानी भारत में पेट्रोल आम लोगों के बजट पर विकसित देशों की तुलना में कहीं ज्यादा असर डालता है।
इन देशों में पेट्रोल सस्ता और कमाई अच्छी
कतर और कुवैत जैसे देशों में 40 लीटर पेट्रोल भरवाने में मासिक आय का केवल लगभग 1% से 2% हिस्सा खर्च होता है। इसी तरह अमेरिका, लग्जमबर्ग और सऊदी अरब भी दुनिया के सबसे बेहतर देशों में शामिल हैं, जहां पेट्रोल आम लोगों की आय के मुकाबले काफी सस्ता माना जाता है। यहां लोगों की एक तो औसत आय बहुत अधिक है ऊपर से घरेलू तेल उत्पादन भी होने से पेट्रोल अन्य देशों के मुकाबले काफी सस्ता है।
यूरोप में पेट्रोल महंगा, लेकिन लोगों पर कम असर
सबसे दिलचस्प बात यह है कि नार्वे, स्विटजरलैंड और जर्मनी जैसे देशों में पेट्रोल की कीमतें ऊंची हैं, लेकिन लोगों की इनकम भी बहुत अधिक है। इन देशों में 40 लीटर पेट्रोल भरवाने पर आम तौर पर मासिक आय का लगभग 2% से 4% हिस्सा ही खर्च होता है। इसलिए महंगे पेट्रोल के बावजूद लोगों पर आर्थिक दबाव अपेक्षाकृत कम रहता है।



















