प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में राम मंदिर को मिले चढ़ावे और दान के रुपयों और आभूषणों की चोरी और हेराफेरी के गंभीर मामले की जांच के लिए सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) सोमवार की सुबह मंदिर परिसर में पहुंच गई है। एसआईटी का नेतृत्व लखनऊ के मंडलीय आयुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं, जिसमें लखनऊ रेंज के आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरत्न कुमार शामिल हैं। किरण एस सीबीआई का डेपुटेशन पूरा करके हाल में ही यूपी काडर में लौटे हैं। नीलरत्न को कई वर्षों का अकाउंट के काम का अनुभव है। राम मंदिर ट्रस्ट ने दान के रुपयों की चोरी का मामला सामने आने के बाद सरकार से इसकी जांच की सिफारिश की थी। सरकार ने जांच टीम से 7 दिन में प्रारंभिक और 15 दिन में पूरी रिपोर्ट देने कहा है।
चर्चा है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर सरकार न सिर्फ कथित हेरफेर बल्कि पूरी व्यवस्था की जांच की तैयारी में है। एसआईटी इस मामले के हर पहलू को खंगालेगी। गणनास्थल की सीसीटीवी फुटेज, दान पेटी से निकालकर गणना कक्ष तक लाने, गिनने और फिर उसे बैंक में जमा करने की प्रक्रिया, गिनती में शामिल सारे लोग जांच के दायरे में है। इस मसले को लेकर राजनीति भी चरम पर है। अखिलेश यादव लगातार सरकार पर हमले कर रहे हैं, वहीं डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सपा अध्यक्ष से बाबरी मस्जिद के नाम पर जमा चंदे पर भी सवाल उठाने कहा है।
एसआईटी ने राम मंदिर के चढ़ावा गणना कक्ष में जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। जांच टीम ने चढ़ावे की गिनती के दौरान कुछ वर्षों में तैनात कर्मचारियों के नाम-पते की सूची मांगी है और उसकी तस्दीक करवा रही है। ट्रस्टियों से भी पूछताछ की संभावना है। एसआईटी राम जन्मभूमि परिसर में कर्मचारी बनने के बाद कर्मचारियों और उनके नजदीकी रिश्तेदारों की आर्थिक हालत को भी जांच के दायरे में रख रही है।
एसआईटी जांच की घोषणा के बाद से ही राम मंदिर की व्यवस्था में लगे संघ और विहिप के लोग सशंकित हैं। उन्हें आशंका है कि उन सबकी जवाबदेही तय होगी। जांच से ट्रस्ट के कर्मचारी खुश दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि काम का जिम्मा हम सबका है और ऐन वक्त पर सुपरविजन के नाम पर ऊपर से लोग बैठा दिए जाते हैं जो पहले से तय व्यवस्थाओं को अपने हिसाब से कराने का दबाव बनाते हैं।

















