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मानसून में बढ़ा मौसमी बीमारियों का प्रकोप, रायपुर के अस्पतालों में वायरल संक्रमण के मरीजों की भीड़

रायपुर। राजधानी रायपुर में लगातार हो रही बारिश और वातावरण में बढ़ी नमी के साथ मौसमी बीमारियों का प्रकोप भी तेजी से बढ़ने लगा है। सरकारी अस्पतालों में वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम, उल्टी-दस्त, गले के संक्रमण और त्वचा संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सबसे अधिक असर बच्चों और बुजुर्गों पर देखने को मिल रहा है, जिससे अस्पतालों की ओपीडी, वार्ड और जांच केंद्रों पर अतिरिक्त दबाव बन गया है।

रोज 60 से अधिक बच्चे पहुंच रहे अस्पताल

पंडरी स्थित जिला अस्पताल की शिशु रोग ओपीडी में इन दिनों प्रतिदिन 60 से अधिक बच्चे वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम, उल्टी-दस्त और अन्य मौसमी संक्रमण की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। इनमें से कई बच्चों की हालत गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। वर्तमान मं  जिला अस्पताल के शिशु रोग वार्ड में 10 बच्चे भर्ती हैं, जिनका इलाज चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार बारिश के मौसम में दूषित पानी, अस्वच्छ भोजन और बढ़ी हुई नमी के कारण संक्रमण तेजी से फैल रहा है, जिससे बच्चों में बीमारी का खतरा अधिक बढ़ गया है।

त्वचा रोगियों की संख्या भी बढ़ी

मानसून का असर त्वचा संबंधी बीमारियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जिला अस्पताल और डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मृति चिकित्सालय की त्वचा रोग ओपीडी में खुजली, दाद, फंगल इंफेक्शन, एलर्जी और त्वचा पर लाल चकत्तों की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।

जांच केंद्रों पर लंबी कतारें

मौसमी बीमारियों के बढ़ते मामलों का असर अस्पतालों की पैथोलॉजी लैब और सैंपल कलेक्शन सेंटर पर भी दिखाई दे रहा है। मरीजों को ब्लड टेस्ट, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड सहित अन्य जांचें करानी पड़ रही हैं। इसके कारण पंजीयन काउंटर से लेकर सैंपल कलेक्शन सेंटर तक लंबी कतारें लग रही हैं। कई मरीजों को जांच के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि दोपहर बाद सैंपल देने वाले कई लोगों की रिपोर्ट शाम तक भी नहीं मिल पा रही है। ऐसे मरीजों को रिपोर्ट लेने और डॉक्टर को दिखाने के लिए अगले दिन फिर अस्पताल आना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों ने बरतने की दी सावधानी

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. निलयी मझोरकर ने बताया कि मानसून के दौरान बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर हो जाती है। ऐसे में वायरल संक्रमण, सर्दी-जुकाम, उल्टी-दस्त और बुखार के मामले तेजी से बढ़ते हैं। उन्होंने अभिभावकों को बच्चों को केवल स्वच्छ और उबला हुआ पानी पिलाने, ताजा भोजन देने तथा व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। यदि बच्चे को तेज बुखार, लगातार उल्टी-दस्त, अत्यधिक सुस्ती, शरीर में पानी की कमी या सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। वहीं मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. आयुषी गोयल ने कहा कि तापमान में उतार-चढ़ाव और वातावरण में बढ़ी नमी के कारण वायरल संक्रमण और मौसमी बीमारियां तेजी से फैलती हैं। लोगों को बारिश के मौसम में साफ और सुरक्षित पानी पीना, ताजा एवं स्वच्छ भोजन करना, हाथों की नियमित सफाई रखना और भीड़भाड़ वाली जगहों पर आवश्यक सावधानी बरतनी चाहिए। किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना अधिक सुरक्षित रहेगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच, उचित उपचार और स्वच्छता संबंधी सावधानियां अपनाकर मानसून में फैलने वाली अधिकांश बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।

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