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15 दिनों में बांधों का जलभराव 8 फीसदी बढ़ा, बारिश से सिंचाई संकट टला

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून की सक्रियता ने जलाशयों को नई संजीवनी दे दी है। पिछले 15 दिनों में लगातार हुई बारिश से प्रदेश के बड़े और मध्यम जलाशयों के जलभराव में आठ प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे खरीफ सीजन में सिंचाई को लेकर किसानों की चिंता काफी हद तक कम हो गई है। जल संसाधन विभाग के अनुसार, प्रदेश के अधिकांश प्रमुख बांधों में जलस्तर तेजी से बढ़ा है और कई जलाशय भरने की स्थिति में पहुंच गए हैं।

विभागीय आंकड़ों के मुताबिक 20 जुलाई तक प्रदेश के 12 बड़े और 34 मध्यम जलाशयों में औसतन 62.41 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है। छह जुलाई को यह आंकड़ा 54.34 प्रतिशत था, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में जलाशयों में केवल 50.67 प्रतिशत पानी उपलब्ध था। यानी इस वर्ष जल भंडारण की स्थिति पिछले साल की तुलना में बेहतर है।

मुंगेली जिले का मनियारी जलाशय अपनी 100 प्रतिशत क्षमता तक भर चुका है। वहीं कोरबा जिले के मिनीमाता बांगो (हसदेव) बांध में 69.69 प्रतिशत, बिलासपुर के खारंग जलाशय में 87.25 प्रतिशत, धमतरी के दुधावा बांध में 71.83 प्रतिशत, सिकासार में 64.36 प्रतिशत, सोंदूर में 67.78 प्रतिशत, कोडार में 60.69 प्रतिशत तथा मुरुमसिल्ली में 46.38 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है। तांदुला, केलो और अन्य जलाशयों में भी जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।

हालांकि गंगरेल जलाशय में जलस्तर में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है, उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 20 जुलाई तक इसका जलभराव 47.16 प्रतिशत दर्ज किया गया है। जल संसाधन विभाग का कहना है कि जून में कमजोर मानसून और भीषण गर्मी के कारण खरीफ सीजन के लिए पानी छोड़ने का दबाव बढ़ने लगा था। वहीं उद्योगों को अनुबंध के अनुसार जलापूर्ति बनाए रखना भी चुनौती थी। लेकिन जुलाई में अच्छी बारिश से स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है।

लगातार वर्षा के कारण प्रदेश के मैदानी क्षेत्रों और बस्तर संभाग में धान की बोआई और रोपाई का कार्य भी तेज हो गया है। पर्याप्त पानी मिलने से किसानों में उत्साह है और सिंचाई को लेकर अनिश्चितता काफी कम हुई है। विभाग ने सभी जलाशयों, नदियों और नालों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर नियंत्रित जल प्रबंधन के निर्देश दिए हैं।

मौसम वैज्ञानिक डॉ. जी.के. दास ने कहा कि प्रदेश में मानसून का अब तक का सामान्य वर्षा कोटा लगभग पूरा हो चुका है। वर्तमान जल भंडारण न केवल खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त साबित होगा, बल्कि आगामी रबी सीजन की सिंचाई आवश्यकताओं और पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। लगातार हो रही बारिश से जल संसाधनों की स्थिति मजबूत हुई है, जिससे कृषि और पेयजल दोनों क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

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