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22 करोड़ की पीईटी-सीटी मशीन आठ साल से बंद, कैंसर मरीज निजी जांच के लिए मजबूर

रायपुर। पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित रीजनल कैंसर सेंटर में करोड़ों रुपये की अत्याधुनिक पीईटी-सीटी और गामा कैमरा मशीनें पिछले साढ़े आठ वर्षों से बंद पड़ी हैं। लगभग 22 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित इन मशीनों के उपयोग में नहीं आने से कैंसर मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि प्रतिदिन करीब 20 मरीजों को पीईटी-सीटी जांच के लिए अन्य संस्थानों में रेफर करना पड़ रहा है।

जानकारों के अनुसार पीईटी-सीटी जांच से यह पता लगाया जाता है कि शरीर के किस हिस्से में कैंसर कितना फैला हुआ है। कैंसर के उपचार और आगे की रणनीति तय करने में यह जांच बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। मशीनें फरवरी 2018 में स्थापित की गई थीं, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से अब तक नियमित रूप से शुरू नहीं हो सकी हैं।

मरीजों का कहना है कि निजी अस्पतालों में पीईटी-सीटी जांच कराने पर 22 से 25 हजार रुपये तक खर्च करना पड़ता है। वहीं, एम्स रायपुर में जांच शुल्क अपेक्षाकृत कम है, लेकिन वहां दो से ढाई महीने तक की प्रतीक्षा सूची होने के कारण मरीजों को निजी संस्थानों का रुख करना पड़ रहा है।

बताया जाता है कि इस वर्ष जनवरी में मशीनों को शुरू करने की योजना बनाई गई थी। इसके लिए विशेषज्ञ कंपनी से तकनीकी मूल्यांकन कराने की भी बात हुई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है। पिछले वर्ष स्वशासी समिति की बैठक में भी मशीनों के संचालन को लेकर चर्चा हुई थी।

मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर रितेश अग्रवाल ने कहा कि मरीजों की जांच जल्द शुरू कराने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि मशीनों की पांच वर्ष की वारंटी अवधि भी वर्ष 2023 में समाप्त हो चुकी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये मशीनें जल्द चालू नहीं हुईं तो कैंसर मरीजों को आर्थिक और चिकित्सकीय दोनों स्तर पर नुकसान उठाना पड़ता रहेगा। यह मामला अब स्वास्थ्य सुविधाओं के बेहतर उपयोग और जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है।

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