प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो दिन में दो बार ईंधन बचाने की अपील कर चुके हैं। साथ ही वह वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन क्लासेज शुरू करने तक की सलाह दे रहे हैं। वहीं, कई बड़े मंत्री भी इस अपील को दोहरा चुके हैं। इसके साथ ही देश में तेल संकट को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कोटा लागू करने की अटकलों के बीच सरकार ने साफ किया है कि देश में पर्याप्त ईंधन है। दरअसल, ईरान और अमेरिका युद्ध के चलते दुनिया की तेल आपूर्ति खासी प्रभावित हुई है।
क्या होती है फ्यूल राशनिंग
ईंधन की राशनिंग का मतलब है सरकार की तरफ से पेट्रोल, डीजल या गैस की बिक्री पर सीमा तय करना। जब देश में तेल की कमी होती है या कीमतें बहुत बढ़ जाती हैं, तो सरकार नियम बनाती है कि एक व्यक्ति या गाड़ी को एक दिन या महीने में कितना ईंधन मिलेगा। इसका मकसद फिजूलखर्ची रोकना और यह सुनिश्चित करना होता है कि सभी को जरूरत भर का तेल मिल सके। जैसे राशन कार्ड पर अनाज मिलता है, वैसे ही तेल के लिए भी कोटा तय कर दिया जाता है ताकि अफरा-तफरी न मचे।
क्या भारत में लागू होगा कोटा
पीटीआई भाषा के अनुसार, पेट्रोलियम मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने सोमवार को कहा कि भारत की ईंधन आपूर्ति में राशनिंग करने यानी कोटा लागू करने की कोई योजना नहीं है। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन में कहा, ‘घबराने की जरूरत नहीं है। पर्याप्त आपूर्ति है। राशनिंग जैसा कुछ नहीं हो रहा है और न ही ऐसा होगा।’
मित्तल ने कहा कि सरकार ने अतिरिक्त ऊर्जा कार्गो हासिल किए हैं और मौजूदा आपूर्तिकर्ताओं से खरीद बढ़ाई गई है। साथ ही पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती जैसे राजकोषीय उपायों के जरिये कीमतों के झटके को खुद सहा है।
भारत के पास कितने दिन का पेट्रोल और LPG
उन्होंने बताया कि बाजार में पिछले 67 दिन से जारी व्यवधान के दौरान भारत ने लगभग 60 दिन का ईंधन भंडार और लगभग 45 दिन का एलपीजी भंडार बनाए रखा है। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल दो साल पुरानी दरों पर ही बिक रहा है। लागत में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के बावजूद कीमतों को स्थिर रखने से पेट्रोलियम कंपनियों को रोजाना 1,000 करोड़ से 1,200 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
इन देशों में हैं कड़े नियम
श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश समेत ऐसे कई देश हैं, जहां फ्यूल राशनिंग या नियंत्रण जैसे उपायों को लागू किया गया है। उदाहरण के लिए स्लोवेनिया में आम गाड़ी वालों को अब हफ्ते में सिर्फ 50 लीटर पेट्रोल/डीजल तय किया गया है। जबकि, किसानों के लिए सीमा 200 लीटर है। वहीं, पाकिस्तान में प्रति वाहन 5 लीटर के करीब ईंधन का नियम है। फ्रांस में कुछ इलाकों में QR कोड का सिस्टम शुरू किया गया है, जिससे एक गाड़ी को हफ्ते में सिर्फ 15 से 20 लीटर तेल ही मिल सकता है।
वहीं जर्मनी में, कुछ जगहों पर एक बार में सिर्फ 10 लीटर पेट्रोल खरीदने की इजाजत दी गई है। श्रीलंका में भी इसी तरह का नेशनल फ्यूल पास क्यूआर सिस्टम है, जिसके तहत यात्री कारों को हर सप्ताह 25 लीटर और मोटर साइकिल को 5 लीटर ईंधन की अनुमति है।
इनके अलावा म्यांमार में ऑड ईवन, स्लोवाकिया में कोटा लागू किया गया है। जबकि, कंबोडिया में करीब 30 फीसदी पेट्रोल स्टेशन ईंधन की कमी के चलते बंद किए जा चुके हैं।



















