प्रयागराज। भारतीय रेलवे में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के बीच प्रयागराज मंडल की महिला लोको पायलटों ने कार्यस्थल पर बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर चिंता जताई है। ट्रेन संचालन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाली महिला कर्मचारियों का कहना है कि लंबी ड्यूटी, वॉशरूम की अनुपलब्धता, नाइट शिफ्ट, छोटे बच्चों की देखभाल और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां आज भी उनके सामने बड़ी समस्या बनी हुई हैं।
प्रयागराज मंडल में वर्तमान में 33 महिला लोको पायलट विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं, जिनमें एक लोको पायलट (गुड्स), सात शंटर लोको पायलट और 25 असिस्टेंट लोको पायलट शामिल हैं। इन कर्मचारियों को औसतन 250 किलोमीटर तक ट्रेन संचालन की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है और कई बार 8 से 10 घंटे तक लगातार ड्यूटी करनी पड़ती है।

महिला लोको पायलटों के अनुसार सबसे बड़ी समस्या साफ और सुलभ वॉशरूम की है। प्रयागराज-कानपुर और प्रयागराज-मुगलसराय जैसे व्यस्त रेलखंडों पर कई बार ट्रेनें लंबे समय तक ऐसे स्थानों पर रुकती हैं, जहां शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं होती। सिग्नल या ट्रैफिक के कारण आउटर पर घंटों इंतजार करना पड़ता है, जिससे उन्हें मजबूरन लंबे समय तक शौच रोककर ड्यूटी करनी पड़ती है।
महिला कर्मचारियों का कहना है कि लगातार ऐसी परिस्थितियों में काम करने से स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। कई कर्मचारियों ने स्किन इंफेक्शन, पेट संबंधी समस्याओं और रक्तचाप जैसी दिक्कतों का उल्लेख किया है। उनका मानना है कि रेलवे भर्ती और पदोन्नति में समान अवसर देता है, लेकिन महिलाओं की विशेष आवश्यकताओं के अनुरूप सेवा नियमों और सुविधाओं में अभी और सुधार की जरूरत है।
कोहरे, बारिश और रात की ड्यूटी के दौरान जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। बारिश के मौसम में व्हील स्लिपिंग जैसी तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जबकि कोहरे में दृश्यता कम होने से ट्रेनें लंबे समय तक आउटर पर खड़ी रह सकती हैं।
इस मुद्दे पर उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशिकांत त्रिपाठी ने कहा कि रेल इंजनों में चरणबद्ध तरीके से यूरिनल की सुविधा विकसित की जा रही है। अधिकांश नए इंजनों में यह व्यवस्था उपलब्ध है और जल्द ही सभी इंजनों में यह सुविधा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे महिला लोको पायलटों को बड़ी राहत मिलेगी।
महिला लोको पायलटों का कहना है कि वे हर मौसम और हर परिस्थिति में यात्रियों की सुरक्षा और समयबद्ध रेल संचालन की जिम्मेदारी निभा रही हैं, अब समय आ गया है कि उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सुविधाओं और नीतियों में भी आवश्यक बदलाव किए जाएं।
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