कच्चे तेल की कीमतों में जारी तेजी के बीच आज फिर से पेट्रोल और डीजल पर बड़ा झटका लगा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों 5 दिन में दूसरी बढ़ोतरी की हैं। आज करीब 1 रुपये का इजाफा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुआ है। बता दें, इससे पहले शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल का रेट 3-3 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिया गया था। तब 2022 के बाद पहली बार कीमतों में इजाफा हुआ था।
देश के अलग-अलग शहरों में क्या है पेट्रोल का रेट? (Petrol Price Today)
दिल्ली – 98.64 रुपये
कोलकाता – 109.70 रुपये
मुंबई – 107.59 रुपये
चेन्नई – 104.46 रुपये
गुरुग्राम – 99.29 रुपये
नोएडा – 98.91 रुपये
बेंगलुरू – 107.12 रुपये
भुवनेश्वर – 105.05 रुपये
चंडीगढ़ – 98.10 रुपये
हैदराबाद – 111.38 रुपये
जयपुर – 109.32 रुपये
लखनऊ – 98.40 रुपये
पटना – 110.02 रुपये
तिरुअनंतपुरम् – 111.71 रुपये
डीजल का क्या चल रहा है रेट (Diesel price today)
नई दिल्ली – 91.58 रुपये
कोलकाता – 96.07 रुपये
मुंबई – 94.08 रुपये
चेन्नई – 96.11 रुपये
गुरुग्राम – 91.80 रुपये
नोएडा – 92.21 रुपये
बेंगलुरू – 95.04 रुपये
भुवनेश्वर – 96.68 रुपये
चंडीगढ़ – 86.09 रुपये
हैदराबाद – 99.95 रुपये
जयपुर – 94.50 रुपये
लखनऊ – 91.73 रुपये
पटना – 96.05 रुपये
तिरुअनंतपुरम् – 100.60 रुपये
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी (Crude oil rate)
सोमवार को एक बार फिर से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखन को मिली। ब्रेंट क्रूड का रेट 2.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल का रेट 70 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास बना हुआ था। यानी कीमतों में भारी तेजी आई है। जिसकी वजह से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा था।
अभी और और बढ़ेंगे दाम? (Petrol Diesel price hike news)
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कम से कम 10-10 रुपये की बढ़ोतरी आवश्यक है। नहीं तो सरकारी तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। तेल कंपनियों ने 5 दिन में 4 रुपये की बढ़ोतरी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में की है। आने वाले दिनों में अगर कच्चे तेल का मार्केट ऐसे ही बढ़ा हुआ रहा तब की स्थिति में पेट्रोल और डीजल का रेट फिर से बढ़ सकता है।
पीएम ने की है अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से पेट्रोल और डीजल की बचत करने की अपील की है। इसके पीछे की वजह मौजूदा स्थिति है। भारत तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए लगभग पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। गिरते रुपये ने इंपोर्ट बिल में इजाफा किया है।



















