ब्रेकिंग खबरें

अंतराष्ट्रीयट्रेंडिंगतकनीकीराष्ट्रीय

तेल-LPG के बाद अब इंटरनेट पर संकट? होर्मुज में किस नए हथियार की तैयारी में ईरान

अमेरिका और ईरान के बीच हालिया युद्ध के बाद से भारत समेत दुनिया के कई देशों में ईंधन संकट पैदा हो गया है। सप्लाई चेन ठप होने की वजह से आयात पर निर्भर देशों में LPG से लेकर पेट्रोल डीजल तक के लिए हाहाकार मचा हुआ है। युद्ध शुरू हुए 2 महीने से ज्यादा का समय बीत गया है लेकिन US और ईरान पीछे हटने को तैयार नहीं है जिसकी वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब भी बंद पड़ा है। इस बीच ईरान अब एक ऐसे हथियार का इस्तेमाल कर सकता है, जिससे कई देशों में इंटरनेट ठप पड़ सकता है। होर्मुज को ब्लॉक करने के बाद, ईरान ने हाल ही में समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स को हथियार बनाने की धमकी दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नीचे बिछी उन केबल्स को निशाना बना सकता है, जिनके जरिए खाड़ी देशों, एशिया और यूरोप के बीच डेटा ट्रांसफर होता है। वहीं ईरान दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों से इन केबल्स पर ‘टोल टैक्स’ वसूलने की तैयारी में है। ईरानी रेवलूशनरी गार्ड्स (IRGC) से जुड़े मीडिया और सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोलफघारी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में इसकी धमकी दी। उन्होंने कहा, “हम इंटरनेट केबल्स पर शुल्क लगाएंगे।”

क्या है ईरान का प्लान?

इस प्लान के मुताबिक ईरान गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा और अमेजन जैसी दिग्गज कंपनियों से इन केबल्स के इस्तेमाल के लिए भारी-भरकम फीस वसूलेगा। वहीं इन अंडरसी केबल्स की मरम्मत और रखरखाव का काम विशेष रूप से केवल ईरानी कंपनियों को ही दिया जाएगा। ईरान का कहना है कि अगर टेक कंपनियों ने ईरानी कानून को नहीं माना, तो इस रूट के इंटरनेट ट्रैफिक को ठप किया जा सकता है।

होर्मुज के नीचे इंटरनेट लाइफलाइन

जानकारी के मुताबिक इस समुद्री रास्ते के नीचे कई अहम केबल सिस्टम सक्रिय हैं।

  1. AAE-1 (एशिया-अफ्रीका-यूरोप 1): यह नेटवर्क दक्षिण-पूर्व एशिया को मिस्र के रास्ते यूरोप से जोड़ता है।
  2. FALCON नेटवर्क: यह भारत और श्रीलंका को खाड़ी देशों, सूडान और मिस्र से जोड़ता है।
  3. गल्फ ब्रिज इंटरनेशनल: यह पूरे खाड़ी क्षेत्र को आपस में जोड़ता है।

क्यों इतने महत्वपूर्ण हैं ये सबसी केबल्स?

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ‘इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन’ (ITU) के अनुसार, दुनिया का 99 फीसदी इंटरनेशनल इंटरनेट ट्रैफिक इन्हीं सबसी फाइबर-ऑप्टिक केबल्स के जरिए चलता है। ये केबल्स यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों की डिजिटल लाइफलाइन हैं, जिन्होंने हाल के सालों में AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में अरबों डॉलर का निवेश किया है। जियो पोलिटिकल विश्लेषक माशा कोटकिन के मुताबिक, अगर इन केबल्स को नुकसान पहुंचता है, तो इंटरनेट की स्पीड कम हो सकती है, ऑनलाइन बैंकिंग ठप हो जाएगी और वैश्विक स्तर पर अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हो सकता है।

नहीं है कोई दूसरा रास्ता?

विशेषज्ञों का साफ कहना है कि केबल्स का फिलहाल कोई व्यावहारिक विकल्प नहीं है। टेलीकॉम रिसर्च फर्म ‘टेलीग्राफी’ के अनुसार, सैटेलाइट्स कभी भी सबसी केबल्स जितना भारी डेटा लोड नहीं संभाल सकते। एलन मस्क के ‘स्टारलिंक’ जैसे नेटवर्क एक सीमित समाधान तो हो सकते हैं, लेकिन करोड़ों यूजर्स का ट्रैफिक संभालना इनके बस की बात नहीं है।

फिर शुरू हो सकती है तबाही

28 फरवरी को ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद पश्चिम एशिया में भीषण जंग छिड़ गई थी। दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल को सीजफायर जरूर हुआ लेकिन स्थिति अब भी नहीं संभली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि घड़ी की सुइयां टिक-टिक कर रही हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो अमेरिका जल्द ही ईरान पर एक बार फिर बड़ा हमला कर सकता है। आने वाले दिनों में इसे लेकर वाइट हाउस के ‘सिचुएशन रूम’ में एक हाई-लेवल मीटिंग भी बुलाई गई है। चर्चा है कि डील न होने से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आगबबूला हैं और इसे देखते हुए युद्ध की आशंका गहरा गई है।

What's your reaction?

Related Posts