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सड़क पर मवेशी छोड़ना पड़ेगा महंगा, अब होगी स्थायी जब्ती

बिलासपुर। सड़कों पर आवारा घूमने वाले मवेशियों से होने वाली दुर्घटनाओं और यातायात बाधाओं पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में अब राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग और अन्य सार्वजनिक सड़कों पर पाए जाने वाले गौवंशीय एवं भैंसवंशीय पशुओं को स्थायी रूप से जब्त किया जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऐसे पशुओं को पकड़ने के बाद दोबारा मालिकों को नहीं लौटाया जाएगा।

कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर जिला प्रशासन, नगर निगम और पशुपालन विभाग संयुक्त रूप से विशेष अभियान चला रहे हैं। प्रशासन का मानना है कि आवारा मवेशियों के कारण सड़क दुर्घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है और यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

 अधिकारियों के अनुसार शहर और आसपास के क्षेत्रों से पकड़े गए पशुओं को फिलहाल मोपका स्थित पशु आश्रय केंद्र में रखा जा रहा है, जहां उनके स्वास्थ्य परीक्षण और संरक्षण की व्यवस्था की जाती है। अब तक कई मामलों में पशुपालक जुर्माना भरकर या निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर अपने पशु वापस ले जाते थे, लेकिन बाद में उन्हें फिर सड़कों पर छोड़ देते थे। इसी प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए प्रशासन ने स्थायी जब्ती का निर्णय लिया है।

नई व्यवस्था के तहत सड़क, राष्ट्रीय राजमार्ग अथवा राज्य मार्ग पर विचरण करते पाए जाने वाले गौवंशीय और भैंसवंशीय पशुओं को जब्त कर उनके पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी। जब्त किए गए सांडों को बैलजोड़ी बनाकर बैगा-बिरहोर समुदाय और जरूरतमंद किसानों को सौंपा जाएगा। वहीं गायों को गौ-इकाई के रूप में पालन-पोषण के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर इन्हें गौशालाओं और गौठानों में भी भेजा जा सकेगा।

प्रशासन ने पशुपालकों से अपने पशुओं की जिम्मेदारीपूर्वक देखभाल करने और उन्हें सड़कों पर खुला नहीं छोड़ने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम सड़क सुरक्षा बढ़ाने, दुर्घटनाओं में कमी लाने और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

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