Raipur News: रायपुर। राजधानी के एक निजी अस्पताल में नसबंदी ऑपरेशन के दौरान हुई चिकित्सकीय लापरवाही के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने महिला की मौत के लिए अस्पताल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराते हुए 20 लाख रुपये क्षतिपूर्ति और 20 हजार रुपये वाद व्यय देने का आदेश दिया है। साथ ही निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी चुकाना होगा।
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीस की पीठ ने अपने फैसले में माना कि नसबंदी ऑपरेशन के दौरान हुई चिकित्सकीय लापरवाही के कारण महिला की किडनी में छेद हो गया, जिससे इंटरनल ब्लीडिंग हुई और अंततः उसकी मृत्यु हो गई। आयोग ने इसे चिकित्सकीय सेवा में कमी और गंभीर लापरवाही माना।

मामला रायपुर के भानसोज ग्राम गोढ़ी स्थित रिम्स (इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस) अस्पताल का है। परिवादी अमित मार्कंडेय ने बताया कि तीन बच्चों के बाद परिवार नियोजन के तहत उनकी पत्नी ममता मार्कंडेय को 8 फरवरी 2022 को नसबंदी ऑपरेशन के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 11 फरवरी को ऑपरेशन के बाद महिला को वार्ड में शिफ्ट किया गया, लेकिन कुछ ही देर बाद उसके पेट में तेज दर्द और सूजन शुरू हो गई। परिजनों द्वारा शिकायत करने पर चिकित्सकों ने इसे सामान्य बताते हुए स्थिति जल्द ठीक होने की बात कही।
आरोप है कि पूरी रात महिला दर्द से तड़पती रही, लेकिन उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। हालत बिगड़ने पर 13 फरवरी की रात उसे मेकाहारा रेफर किया गया, जहां चिकित्सकों ने आंत में छेद होने की आशंका जताई। बाद में उसे उर्मिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान 14 फरवरी 2022 को उसकी मौत हो गई।
एक साल बाद आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट
महिला की मौत के लगभग एक वर्ष बाद 7 फरवरी 2023 को जारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण सेप्टीसीमिया, एक्यूट ट्यूबुलर किडनी इंजरी और इंट्रापल्मोनरी हेमरेज बताया गया। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट हुआ कि ऑपरेशन के दौरान हुई जटिलताओं और चिकित्सकीय लापरवाही के चलते महिला की स्थिति गंभीर हुई थी।
45 दिनों में करना होगा भुगतान
आयोग ने अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया है कि वह 45 दिनों के भीतर परिवादी को 20 लाख रुपये क्षतिपूर्ति राशि और 20 हजार रुपये वाद व्यय का भुगतान करे। यह राशि मृतका की मृत्यु तिथि से 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देनी होगी। यदि निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं किया जाता है तो अस्पताल प्रबंधन को 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ राशि अदा करनी होगी। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि पत्नी की असामयिक मृत्यु से परिवादी और उसके परिवार को अपूरणीय मानसिक पीड़ा एवं क्षति पहुंची है, जिसकी भरपाई के लिए यह मुआवजा उचित है।


















