रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून की सुस्त रफ्तार और लंबे ब्रेक ने खेती-किसानी की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश की 251 में से 230 तहसीलों में औसत से कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि 185 तहसीलों में सामान्य वर्षा का 50 प्रतिशत भी नहीं हो पाया है। बारिश की कमी का सीधा असर खरीफ सीजन की बुआई पर पड़ा है और अब तक धान की केवल 9 प्रतिशत बोनी ही हो सकी है।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस अवधि तक प्रदेश में सामान्य रूप से 58.9 मिमी वर्षा होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल 23.4 मिमी औसत बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य वर्षा का मात्र 39.7 प्रतिशत है। सभी 33 जिलों में औसत से कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जबकि 22 जिलों में सामान्य वर्षा का आधा हिस्सा भी नहीं पहुंच पाया है।
खरीफ बुआई बुरी तरह प्रभावित
कृषि विभाग ने इस वर्ष लगभग 38.78 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई का लक्ष्य रखा है, लेकिन अब तक केवल 3.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुआई हो पाई है। यह कुल लक्ष्य का मात्र 9 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी अवधि तक लगभग 39 प्रतिशत क्षेत्र में धान की बोनी पूरी हो चुकी थी। बारिश आधारित खेती वाले इलाकों में किसान पर्याप्त नमी के अभाव में बुआई शुरू करने से बच रहे हैं। जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वहां धान के लिए बरहा डालने का काम शुरू हुआ है, लेकिन अधिकांश किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
किसानों की बढ़ी चिंता
रायपुर, महासमुंद, धमतरी, दुर्ग, बेमेतरा, राजनांदगांव, कांकेर, बलौदाबाजार-भाटापारा, गरियाबंद, बालोद और खैरागढ़ सहित प्रदेश के अधिकांश जिलों में किसान मानसून की सक्रियता का इंतजार कर रहे हैं। कई क्षेत्रों में खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बनने से खुर्रा बोनी तक शुरू नहीं हो सकी है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अपर्याप्त नमी में जल्दबाजी में बुआई करने से बीज खराब होने का खतरा रहता है। किसानों को मौसम की स्थिति का आकलन कर ही बुआई का निर्णय लेना चाहिए।
सरकार तैयार कर रही वैकल्पिक योजना
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि प्रदेश में वर्षा और खरीफ बुआई की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। अल्प वर्षा और खंड वर्षा की स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक कार्ययोजना भी तैयार की जा रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मानसून सक्रिय होते ही खेती-किसानी के कार्यों में तेजी आएगी। वहीं कृषि मौसम वैज्ञानिक जीके दास का कहना है कि धान और अन्य खरीफ फसलों की बुआई के लिए किसानों को पर्याप्त बारिश का इंतजार करना चाहिए। जहां सिंचाई की व्यवस्था उपलब्ध है, वहां धान का बरहा डाला जा सकता है, जबकि पर्याप्त वर्षा के बाद बतर बुआई अधिक लाभदायक रहेगी। उन्होंने कतार पद्धति से धान की बोनी को भी किसानों के लिए बेहतर विकल्प बताया।
185 तहसीलों में गंभीर स्थिति
राजस्व विभाग के अनुसार प्रदेश की केवल 21 तहसीलों में ही वर्षा की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, जबकि 230 तहसीलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। इनमें से 185 तहसीलों में औसत वर्षा की तुलना में 50 प्रतिशत से भी कम बारिश हुई है। राज्य की संभावित औसत वार्षिक वर्षा 1238 मिमी है, लेकिन शुरुआती मानसूनी अवधि में वर्षा का आंकड़ा काफी पीछे चल रहा है।
बस्तर तक नहीं पहुंच पाया पूरी तरह मानसून
मौसम विभाग के मुताबिक छत्तीसगढ़ में मानसून के आगमन की सामान्य तिथि 13 जून मानी जाती है, लेकिन इस बार इसकी प्रगति धीमी रही है। मानसून अभी तक बस्तर संभाग के सभी हिस्सों को पूरी तरह कवर नहीं कर पाया है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रदेशभर में व्यापक वर्षा शुरू होने और मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने में अभी कुछ और समय लग सकता है। मानसून की इस सुस्ती ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।


















