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विराजमान रामलला को पसंद है रबड़ी

अयोध्या . रामलला का पसंदीदा आहार दूध-रबड़ी है. दूध से निर्मित मिष्ठान व खोवा के पेड़े का बालभोग लगाया जाता है. सुबह पांच बजे ही भोग के लिए पांच किलो रबड़ी, शाम को पांच लीटर दूध की आपूर्ति की जाती है.

भोग के लिए खाद्य सामग्रियों की आपूर्ति करने वाले सीताराम यादव अब 75 साल के हो चुके हैं. वह बताते हैं कि 1950 से भगवान के भोग के लिए दूध-रबड़ी की आपूर्ति उन्हीं का परिवार कर रहा है. पहले उनके पिता धनपत यादव ने यह जिम्मेदारी निभाई और अब वह खुद निभा रहे हैं. बताते हैं कि उनकी पत्नी के निधन के बाद छोटी बेटी श्यामा यादव ने इसमें सहयोग के लिए क्रिकेट कोच की नौकरी छोड़ दी. डाभासेमर से स्थानान्तरण होने के बाद यहीं रह गईं.

देशी घी से बनता है भोग: रामलला के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येन्द्र दास शास्त्रत्त्ी बताते हैं कि सुबह भगवान के जगने पर बालभोग लगाया जाता है. इसमें रबड़ी दी जाती है. शृंगार आरती के बाद फलों का भोग लगता है. दोपहर में राजभोग लगता है, जिसमें पूड़ी-सब्जी, चावल-दाल व खीर रहती है. अपराह्न में जगने पर फल व मिठाई का भोग लगाया जाता है. शाम को फिर से मिठाई, रात में पूड़ी-सब्जी व खीर का भोग लगता है. विशेष पर्वों पर 56 भोग या विशेष व्यंजनों का भोग लगता है.

लगाया जाता है. एकादशी को फलाहार एवं सिंघाड़ा या कुट्टू आटे की पूड़ी या पकौड़ी भी परोसी जाती है. वह बताते हैं कि खाद्यान्न की आपूर्ति परम्परागत रूप से एक परिवार करता आ रहा है. भगवान के भोग प्रसाद के लिए देशी घी का ही प्रयोग किया जाता है. महीने में 25-30 किलो देशी प्रयोग होता है.

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