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छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिला आरक्षण संकल्प पारित, विपक्ष ने किया बहिष्कार

छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिला आरक्षण को लेकर सरकार की तरफ से संकल्प प्रस्ताव लाया गया. सदन में इसे ध्वनि मत पारित कर लिया गया है. हालांकि इसको लेकर विपक्ष ने बहिष्कार कर दिया है. वहीं इससे पहले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास ना होने पर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा.

‘कांग्रेस ने 5 दशकों में भी महिलाओं के लिए कुछ नहीं किया’

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महिला आरक्षण बिल पर बोलते हुए कहा, ‘केंद्र सरकार ने नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम लाई. महिलाओं को आरक्षण देने के लिए बिल लाया गया था, विपक्ष ने परिसीमन को लेकर बिल का विरोध किया था. विपक्ष का विरोध समझ के परे है. परिसीमन होता तो क्षेत्र बढ़ता और ज्यादा लोगों को मौका मिलता. मैं रायगढ़ से चार बार सांसद रहा, 350 किलोमीटर का क्षेत्र है. एक सांसद दिन-रात भी घूमेगा तो सभी जगह नहीं जा सकता है. परिसीमन होता तो क्षेत्र बंटता, विकास भी होता तो लोग वहां तक जाते. जहां तक श्रेय की बात है पीएम ने कहा था श्रेय आप ले लीजिए. प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने बड़ी सरलता से अपनी बात रखी.

विपक्ष ने परिसीमन, जनगणना की बात को लेकर विरोध किया. इसके लिए देश और प्रदेश की जनता आपको कभी माफ नहीं करेगी. आज भी समय है संकल्प सर्वसम्मति से पारित करेंगे तो आक्रोश कम हो सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जितना महिलाओं के लिए काम किया. कांग्रेस ने पांच दशकों में उतना काम नहीं किया. जनजातीय समाज की बहन द्रौपदी मुर्मू को सर्वोच्च पद पर आसीन कराया.’

विधानसभा की कार्यवाही स्थगित

छत्तीसगढ़ विधानसभा में एक दिन का विशेष सत्र बुलाया गया था. ध्वनि मत से संकल्प पारित होने के बाद सत्र को स्थगित कर दिया गया है. इस सत्र को महिला आरक्षण को लेकर संकल्प सत्र पारित करने के लिए बुलाया गया था. इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोंकझोंक देखने को मिली. सदन में चर्चा के दौरान बीजेपी विधायक लता उसेंडी ने कहा कि विपक्ष ने महिला आरक्षण को रोकने का काम किया है. इसके जवाब में कांग्रेस विधायक अनिल भेड़िया ने कहा कि आरक्षण बिल चुनावी झुनझुना है. जनता को पता है कि बिल को 2023 में ही पास कर लिया गया था, लेकिन लागू नहीं किया गया.

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