Chandra Grahan 2026:आज साल का पहला चंद्रग्रहण लग रहा है। दोपहर 3 बजकर 30 मिनट पर ग्रहण लगेगा। इस ग्रहण के दौरान कुछ कामों को नहीं करना चाहिए। भगवान की पूजा और मूर्ति स्पर्श और गर्भवती महिलाओं के लिए भी कुछ नियम बताए गए हैं। चंद्र ग्रहण 2026 समय चंद्र ग्रहण प्रारंभ होने का समय दोपहर 3 बजकर 20 मिनट चंद्र ग्रहण का खग्रास प्रारंभ शाम में 4 बजकर 34 मिनट पर ग्रहण का मध्य दोपहर में 5 बजकर 33 मिनट पर चंद्र ग्रहण शाम में 6 बजकर 47 मिनट पर समाप्त हो जाएगा। अभी के समय में चंद्र ग्रहण का सूतक शुरू हो गया है। अब दोपहर को ग्रहण लगेगा। आइए जानें कि ग्रहण के समय में किन कामों का नहीं करना चाहिए और किन कामों को करना चाहिए।
चंद्रग्रहण के पहले और बाद में स्नान
आपको बता दें कि चंद्रग्रहण आज लग रहा है, सूतक काल से पहले स्नान कर भगवान की पूजा करें, सूतक काल में भगवान को ना छुएं। अब ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान करके ही भगवान को स्नान कराएं और मंदिर को साफ करें। इस तरह आप सूतक काल से पहले और ग्रहण के बाद स्नान कर सकते हैं।
ग्रहण के दौरान के कपड़ों को धो कर ही पहनें
ग्रहण के समय आपने जो कपड़े पहने थे, उन्हें धोकर पहनें, ग्रहण के बाद स्नान करके नए कपड़े पहने और घर की भी साफ सफाई करें। इसके अलावा गंगाजल जरूर छिड़कें। अगर बीमारी के कारण स्नान ना कर पाएं तो कम से कम गंगाजल छिड़क लें।
तुलसी से जुड़े नियम
चंद्रग्रहण से पहले तुलसी को तोड़ लें, अगर आपको खाने और पीने की चीजों में डालनी हैं। ग्रहण में तुलसी को ना छुआ जाता है और ना तोड़ा जाता है और ना ही इसमें पानी दिया जाता है। ऐसा कहा जाता है खाने की गीली चीजों में तुलसी डालनी चाहिए, सूखे चीजों को लेकर तुलसी डालने के नियम नहीं है।
ग्रहण से जुड़े खाने और पीनें
ग्रहण से पहले तीन पहर भोजन नहीं करना चाहिए। इस दौरान नियमों का पालन करना चाहिए। बालक, वृद्ध और रोगियों को इस नियम में छूट दी गई है। ग्रहण की विकिरणों से रक्षा के लिए भोज्य पदार्थों में कुशा या तुलसी दल अवश्य डालें। विज्ञापन विशेषकर गर्भवती स्त्रियों को ग्रहण काल में घर के भीतर रहकर भजन करना चाहिए, जिससे गर्भस्थ शिशु पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
ग्रहण के दिन क्या दान करें
सामर्थ्य अनुसार श्वेत वस्तुओं जैसे चावल, दुग्ध तथा चांदी का दान करें। इसके अलावा जिस भी राशि पर ग्रहण भारी हो, उसे अपने राशि के अनुसार चीजों का दान करना चाहिए। ग्रहण समाप्ति के बाद बिना स्नान किए न तो कोई नित्य कर्म करें और न ही देव-पूजा। स्नान के पश्चात ही शरीर एवं मन की पूर्ण शुद्धि मानी जाती है।



















