इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हो रहे हैं। इस दिन कलश स्थापना के लिए भी बहुत ही उत्तम मुहूर्त है, जिसमें कलश स्थापना बहुत ही फलदायी रहेगी। 2026 के चैत्र नवरात्रि इस बार बहुत खास माने जा रहे हैं। दरअसल 9 दशकों के बाद ऐसा मुहूर्त बन रहा है। जब ऐसा मुहूर्त मिल रहा है। जिसमें संवत्सर के आखिरी दिन से चैत्र नवरात्रि शुरू हो रहे हैं। ऐसे में यह बहुत ही उत्तम मुहूर्त बन रहा है। इस साल अमावस्या के साथ क्षय होने वाली प्रतिपदा तिथि भी है, जो बहुत शुभ मानी जाती है। यही नहीं ग्रह नक्षत्रों के भी उत्तम योग है, जो बहुत खास माने जा रहे हैं। आइए इनके बारे में नीचे विस्तार से जानते हैं।
इस साल नवरात्रि पर कब कर सकते हैं कलश स्थापना
इस साल चैत्र नवरात्रि पर कलश स्थापना के लिए दो शुभ और उत्तम मुहूर्त हैं। अगर आप सुबह में जल्दी से जल्दी कलश स्थापना करना चाहते हैं, तो पहला मुहूर्त सुबह 6:02 से 7:43 तक और अगर आप दोपहर में कलश स्थापना करना चाहते हैं, तो दूसरा दोपहर 12:05 से 12:53 तक रहेगा।
चैत्र नवरात्रि पर नक्षत्रों का उत्तम संयोग
चैत्र नवरात्र के पहले दिन तीन विशिष्ट योग बनेंगे। इस साल अमावस्या तिथि उदया काल में रहेगी। प्रतिपदा तिथि पूरे दिन रहेगी, लेकिन उदायाकल में नहीं है। वहीं शुक्ल, ब्रह्म और सर्वार्थसिद्धि योग भी इस बार नवरात्रि को और भी अधिक लाभकारी बना रहे हैं। शुक्ल योग 19 मार्च सूर्योदय से मध्यरात्रि के बाद 01:17 बजे तक रहेगा। वैदिक ज्योतिष में यह 27 नित्य योगों में 24वां शुभ योग है। इस योग को चंद्रशासित माना गया है। यह शांति, सकारात्मकता और काम में सफलता दिलाता है। वहीं इस दिन ब्रह्म योग भी बन रहा है। ब्रह्म योग 19 मार्च को मध्यरात्रि के बाद 01:17 बजे से 20 मार्च मध्याह्न तक रहेगा। यह अत्यंत शुभ और दुर्लभ योग है, जिसमें साधक की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।
बिजनेस में भी होगा लाभ, ऐसे योग
इस साल चैत्र नवरात्रि पर ज्ञान, भाग्य और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। बृहस्पति नौवें, शुक्र 11वें और बुध 10वें या लग्न के स्वामी से केंद्र में होने पर विशिष्ट योग बनता है। इसलिए इस बार ग्रहों का भी उत्तम संयोग चैत्र नवरात्रि पर बन रहा है। सर्वार्थसिद्धि योग 19 मार्च को दोपहर 01:26 से रात्रि 11:21 बजे तक रहेगा। यह शुभ और ज्योतिषीय संयोग वाला होता है। यह विशेष वार और नक्षत्रों के मेल से बनता है। इसलिए अगर आप बिजनेस में भी लाभ पाना चाहते हैं, तो इस योग में कार्यों को शुरू कर सकते हैं। नए बिजनेस की शुरुआत, खरीदारी, निवेश सहित कई कामों में इस योग में निश्चित सफलता मिलती है।
| दिन | तारीख | किस देवी की होती है पूजा |
| पहला दिन | मार्च 19, 2026 | इस दिन शैलपुत्री देवी की पूजा की जाती है। |
| दूसरा दिन | मार्च 20, 2026 | इस दिन ब्राह्माचारिणी देवी की पूजा की जाती है। |
| तीसरा दिन | मार्च 21, 2026 | इस दिन चंद्रघंटा देवी की पूजा की जाती है। |
| चौथा दिन | मार्च 22, 2026 | इस दिन कूष्माणा देवी की पूजा की जाती है। |
| पांचवां दिन | 23 मार्च 2026 | इस दिन स्कंदमाता देवी की पूजा की जाती है। |
| छठा दिन | 24 मार्च 2026 | इस दिन कात्यानी देवी की पूजा की जाती है। |
| सातवां दिन | 25 मार्च 2026 | इस दिन कालरात्री की पूजा की जाती है। |
| आठवां दिन | 26 मार्च 2026 | इस दिन महागौरी की पूजा की जाती है। नवरात्र की अष्टमी तिथि बहुत खास मानी जाती है। इस दिन कुछ लोग कन्या पूजन भी करते हैं। |
| नौवां दिन | 27 मार्च 2026 | इस दिन सिद्धदात्री देवी की पूजा होती है, इस दिन रामनवमी भी है। |



















