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एक से ज्यादा PPF अकाउंट, हो सकता है लॉस

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) आज भी देश की सबसे पॉपुलर सेविंग स्किम्स में से एक है. सरकारी गारंटी, टैक्स छूट और लॉन्ग पीरियड में अच्छा रिटर्न मिलने की वजह से लाखों लोग इसमें इन्वेस्ट करते हैं. लेकिन पीपीएफ से जुड़ा एक नियम ऐसा है, जिसकी जानकारी न होने पर निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है.

कई लोग सुविधा के लिए या फिर ज्यादा निवेश करने के इरादे से अलग-अलग बैंकों या पोस्ट ऑफिस में एक से ज्यादा पीपीएफ अकाउंट खुलवा लेते हैं. अगर आपने भी ऐसा किया है, तो आपको सावधान होने की जरूरत है, क्योंकि जो नियम हैं वे इसकी अनुमति नहीं देते.

एक व्यक्ति के नाम पर सिर्फ एक PPF अकाउंट

पीपीएफ नियमों के अनुसार, कोई भी भारतीय नागरिक अपने नाम पर केवल एक ही पीपीएफ अकाउंट रख सकता है. यह नियम सभी बैंकों और पोस्ट ऑफिस पर समान रूप से लागू होता है. यानी अगर आपने एक अकाउंट सरकारी बैंक में और दूसरा किसी निजी बैंक या पोस्ट ऑफिस में खुलवा रखा है, तब भी उसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा. सरकारी रिकॉर्ड में ऐसे खातों को मल्टीपल पीपीएफ अकाउंट माना जाता है.

क्या एक से ज्यादा अकाउंट हैं?

कई बार जानकारी नहीं होने से लोग दूसरा पीपीएफ अकाउंट खुलवा लेते हैं. बाद में यह गलती भारी पड सकती है. पीपीएफ में एक वित्त वर्ष के दौरान अधिकतम 1.5 लाख रुपये ही जमा किए जा सकते हैं. यह सीमा सभी खातो को मिलाकर लागू होती है. अगर किसी व्यक्ति के दो अकाउंट हैं, तब भी वह कुल 1.5 लाख रुपये से ज्यादा जमा नहीं कर सकता. यदि किसी व्यक्ति के नाम पर एक से ज्यादा पीपीएफ अकाउंट हैं, तो दूसरा अकाउंट इरेगुलर एनाउंस हो सकता है. ऐसे खाते में जमा रकम पर ब्याज नहीं मिलेगा. टैक्स छूट और मैच्योरिटी के समय भी परेशानी हो सकती है.

गलती से दो अकाउंट खुले तो..

अगर आपके नाम पर पहले से दो पीपीएफ अकाउंट हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है. सबसे पहले अपने बैंक या पोस्ट ऑफिस से संपर्क करें और खाते को नियमित कराने की प्रक्रिया शुरू करें. आमतौर पर पहले खुले अकाउंट को मुख्य खाता माना जाता है. इसके बाद दूसरे खाते को बंद कर उसमें जमा राशि को मुख्य खाते में ट्रांसफर किया जाता है. जितनी जल्दी यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाए, उतना बेहतर रहेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि इस गलती को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि मैच्योरिटी या ट्रांसफर के समय यह मामला सामने आ सकता है और फिर प्रक्रिया काफी लंबी हो जाती है.

इन्वेस्टमेंट करने के लिए अभी भी बेहतर विकल्प है पीपीएफ

PPF को लंबे समय की बचत के लिए सबसे भरोसेमंद विकल्प माना जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें जमा राशि, मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम तीनों ही टैक्स के दायरे से बाहर रहती हैं. यही वजह है कि रिटायरमेंट की | तैयारी करने वाले निवेशक इसे पसंद करते हैं. फिलहाल पीपीएफ की अवधि 15 साल होती है, जिसे मैच्योरिटी के बाद पांच-पांच साल के ब्लॉक में आगे भी बढ़ाया जा सकता है. निवेशक इसमें सालाना कम से कम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये जमा कर सकते है. सरकार हर तिमाही इसकी ब्याज दर की समीक्षा करती है.

बच्चों के नाम पर भी पीपीएफ अकाउंट खोल सकते हैं

माता-पिता अपने नाबालिग बच्चे के नाम पर पीपीएफ अकाउंट खुलवा सकते हैं. हालांकि यहां भी एक अहम नियम लागू होता है. माता-पिता के खाते और बच्चे के खाते में मिलाकर भी कुल निवेश की सीमा 1.5 लाख सालाना ही रहेगी. यानी बच्चे के नाम पर अलग अकाउंट खुलवाने से निवेश या टैक्स छूट की सीमा नहीं बढ़ती. साथ ही, पीपीएफ अकाउंट संयुक्त नाम से नहीं खोला जा सकता.

बैंक बदलना है तो नया अकाउंट न खोलें

अगर आप किसी दूसरे शहर में चले गए हैं या अपने मौजूदा बैंक की सेवाओं से संतुष्ट नहीं है, तो नया पीपीएफ अकाउंट खोलने की जरूरत नहीं है.

आप अपने मौजूदा पीपीएफ खाते को एक बैंक से दूसरे बैंक या पोस्ट ऑफिस में आसानी से ट्रांसफर कर सकते हैं. आज अधिकांश बैंक ऑनलाइन पीपीएफ सेवाएं भी दे रहे हैं, जिससे खाते को कहीं से भी संचालित किया जा सकता है.

दो पीपीएफ खुल गए तो तुरंत नियमित कराएं

पीपीएफ सुरक्षित और टैक्स बचाने वाला शानदार निवेश विकल्प है, लेकिन इसके नियमों का पालन करना जरूरी है. अगर आपके नाम पर गलती से एक से ज्यादा पीपीएफ अकाउंट खुल गए हैं, तो उसे जल्द से जल्द नियमित करा लें. छोटी सी लापरवाही भविष्य में ब्याज, टैक्स लाभ और मैच्योरिटी राशि पर असर डाल सकती है.

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