रायपुर। राजधानी रायपुर में यातायात नियमों के उल्लंघन पर पुलिस की सख्ती लगातार बढ़ रही है। इस वर्ष के पहले छह महीनों में ही ट्रैफिक पुलिस ने 2,352 वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करा दिए हैं। यह आंकड़ा पूरे वर्ष 2025 में निलंबित हुए 2,065 लाइसेंस के रिकॉर्ड को भी पार कर चुका है। इसके बावजूद सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों का ग्राफ कम नहीं हो रहा है। वर्ष 2026 में अब तक रायपुर जिले में 1,190 सड़क हादसे दर्ज किए गए हैं, जिनमें 373 लोगों की जान जा चुकी है। यह प्रदेश के सभी जिलों में सबसे अधिक है।
यातायात पुलिस के अनुसार गंभीर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। केवल चालान काटने तक कार्रवाई सीमित नहीं है, बल्कि लापरवाह चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस भी निलंबित किए जा रहे हैं, ताकि दोबारा नियम तोड़ने से रोका जा सके। इसके बावजूद दुर्घटनाओं में अपेक्षित कमी नहीं आ रही है, जिससे साफ है कि केवल दंडात्मक कार्रवाई सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
नशे में वाहन चलाने वालों पर सबसे ज्यादा कार्रवाई
जनवरी से जून 2026 के बीच सबसे अधिक कार्रवाई नशे में वाहन चलाने वालों पर हुई। इस दौरान 2,164 चालकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उनके वाहन जब्त किए गए और ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित कराए गए। इसके अलावा 167 ओवरस्पीड चालकों और 21 मोबाइल फोन पर बात करते हुए वाहन चलाने वाले चालकों के लाइसेंस भी निलंबित किए गए। औसतन हर दिन 13 और हर महीने करीब 390 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए जा रहे हैं, जो ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के खिलाफ पुलिस की सख्ती को दर्शाता है।
रायपुर में सबसे ज्यादा हादसे और मौतें
रायपुर जिले में इस वर्ष अब तक 1,190 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 373 लोगों की मौत हुई है। यह आंकड़ा प्रदेश में सबसे अधिक है। इनमें से 261 मौतें रायपुर ग्रामीण क्षेत्र में हुईं, जबकि रायपुर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में 112 लोगों की जान गई।
ग्रामीण क्षेत्रों में धरसींवा में 40, तिल्दा-नेवरा में 34, खरोरा में 33, मंदिरहसौद में 29, अभनपुर में 25 और आरंग में 22 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई। यानी इन छह थाना क्षेत्रों में ही 155 लोगों ने सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाई।
ग्रामीण क्षेत्र में ट्रैफिक पुलिस बल की कमी
सड़क सुरक्षा की चुनौती इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि रायपुर ग्रामीण जिले में अब तक अलग ट्रैफिक पुलिस बल स्वीकृत नहीं किया गया है। पुलिस कमिश्नरेट बनने के बाद ग्रामीण जिले को स्वीकृत बल की तुलना में काफी कम पुलिसकर्मी मिले हैं। आरक्षकों के 780 स्वीकृत पदों के मुकाबले करीब 300 जवान ही उपलब्ध हैं। अधिकारियों का कहना है कि जिले में कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए कम से कम 2,000 पुलिसकर्मियों की आवश्यकता है। सीमित स्टाफ के कारण थानों को कानून-व्यवस्था और ट्रैफिक, दोनों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।
केवल चालान नहीं, जागरूकता भी जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क हादसों में कमी केवल चालान और लाइसेंस निलंबन से नहीं आएगी। खासकर शहर के बाहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने की प्रवृत्ति गंभीर चिंता का विषय है। यदि हेलमेट पहनने, गति सीमा का पालन करने और नशे में वाहन नहीं चलाने जैसे नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए और इसके साथ जनजागरूकता अभियान भी चलाए जाएं, तो सड़क दुर्घटनाओं और मौतों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।


















