रायपुर। खरीफ सीजन में खाद की कमी और बढ़ती कृषि लागत से जूझ रहे किसानों के सामने अब एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए एग्री स्टैक पोर्टल पर सामिलात खातेदारों का पंजीयन अनिवार्य किए जाने से किसान खेतों की बजाय चॉइस सेंटरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। पंजीयन की अंतिम तिथि 31 जुलाई तय होने के कारण प्रदेशभर के चॉइस सेंटरों में भीड़ बढ़ गई है और किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि खरीफ फसल की बुआई और खेतों में काम के बीच सभी सामिलात खातेदारों का पंजीयन कराना आसान नहीं है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि संयुक्त (सामिलात) खातों में सभी सदस्यों का अलग-अलग पंजीयन करना पड़ रहा है, जिसमें काफी समय लग रहा है। पोर्टल की धीमी गति और तकनीकी खामियों के कारण प्रक्रिया और भी कठिन हो गई है।
लंबरदार व्यवस्था का हवाला दे रहे किसान
किसानों का कहना है कि अब तक संयुक्त खातों में लंबरदार या मुखिया के नाम से ही पंजीयन, गिरदावरी, अनावरी रिपोर्ट और समर्थन मूल्य पर धान बेचने जैसी सभी प्रक्रियाएं पूरी होती रही हैं। ऐसे में अचानक सभी खातेदारों का अलग-अलग पंजीयन अनिवार्य करना अनावश्यक बोझ है।
किसानों ने यह भी चिंता जताई है कि यदि परिवार के किसी सदस्य के बीच विवाद हो या किसी कारणवश उसका पंजीयन समय पर नहीं हो पाए, तो इसका असर पूरे खाते पर पड़ सकता है और अन्य सदस्य भी समर्थन मूल्य पर धान बेचने से वंचित हो सकते हैं।
चॉइस सेंटरों में तकनीकी दिक्कतें
चॉइस सेंटरों में एग्री स्टैक पोर्टल की धीमी गति, सर्वर संबंधी समस्याएं और तकनीकी त्रुटियां किसानों की परेशानी बढ़ा रही हैं। कई स्थानों पर किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि पंजीयन प्रक्रिया पूरी होने में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है।
किसान संगठनों ने उठाए सवाल
किसान संगठनों ने सामिलात खातेदारों के लिए पंजीयन अनिवार्य किए जाने पर सवाल उठाए हैं। किसान नेता उधोराम वर्मा का आरोप है कि सरकार धान खरीदी में अनावश्यक बाधाएं खड़ी कर रही है। उनका कहना है कि खाद, बीज, बिजली, एग्री स्टैक पंजीयन, गिरदावरी और अनावरी जैसी प्रक्रियाओं के जरिए किसानों को लगातार परेशान किया जा रहा है।
वहीं, छत्तीसगढ़ किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र शर्मा का कहना है कि सामिलात खातों के पंजीयन में कई तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं। इस प्रक्रिया के लिए संबंधित कर्मचारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया है, जिससे बड़ी संख्या में किसानों के पंजीयन से वंचित रहने की आशंका है।
पंजीयन अवधि बढ़ाने की मांग
किसान संगठनों ने सरकार से मांग की है कि एग्री स्टैक पोर्टल पर सभी खाताधारकों का पंजीयन पूरा होने तक प्रक्रिया जारी रखी जाए और अंतिम तिथि बढ़ाई जाए। उनका कहना है कि यदि समय सीमा नहीं बढ़ाई गई तो बड़ी संख्या में किसान समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने से वंचित हो सकते हैं, जिसका सीधा असर उनकी आय पर पड़ेगा।


















