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250 करोड़ से अधिक के धान का हिसाब उलझा, 1.27 लाख मीट्रिक टन रिकॉर्ड में गड़बड़ी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में रिकॉर्ड धान खरीदी के बाद अब 250 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के धान के लेखे-जोखे में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। भौतिक सत्यापन और लेखा मिलान के दौरान करीब 1.27 लाख मीट्रिक टन धान का रिकॉर्ड मेल नहीं खा रहा है। कहीं इसे सूखत बताया जा रहा है, तो कई मामलों में धान का उठाव होने के बावजूद ऑनलाइन प्रविष्टि नहीं होने की बात सामने आई है। अनियमितताओं के बाद कई सहकारी समितियों के प्रबंधकों, कंप्यूटर ऑपरेटरों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।
खाद्य विभाग और मार्कफेड के अनुसार खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में प्रदेश की 2058 सहकारी समितियों के 2740 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से समर्थन मूल्य पर 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की रिकॉर्ड खरीदी की गई। इसके बाद हुए भौतिक सत्यापन में उपार्जन केंद्रों में करीब 72 हजार मीट्रिक टन और संग्रहण केंद्रों में लगभग 55 हजार मीट्रिक टन धान का अंतर पाया गया। कुल मिलाकर 1.27 लाख मीट्रिक टन धान का रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं हो पाया है, जिसकी अनुमानित कीमत 250 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।

30 अप्रैल तक होना था उठाव, कई केंद्रों में अब भी स्टॉक
त्रिस्तरीय अनुबंध के अनुसार खरीदी केंद्रों से धान का शत-प्रतिशत उठाव 30 अप्रैल तक पूरा होना था, लेकिन जुलाई के अंतिम सप्ताह तक भी कई केंद्रों में रिकॉर्ड लंबित है। विशेषकर बस्तर संभाग समेत कई जिलों में धान उठाव शेष दर्ज है। लगातार बारिश के कारण खुले में रखा धान भीगने और खराब होने का खतरा बढ़ गया है। समिति प्रबंधकों का कहना है कि उनकी जिम्मेदारी किसानों से धान खरीदने तक सीमित है, जबकि उठाव और परिवहन की जिम्मेदारी मार्कफेड की है।

कांकेर और कोंडागांव में सबसे ज्यादा अंतर
रिकॉर्ड के अनुसार उपार्जन केंद्रों में सबसे अधिक 13,949 मीट्रिक टन धान का अंतर कांकेर जिले में दर्ज किया गया है। इसके बाद कोंडागांव में 7,201 मीट्रिक टन धान उठाव के लिए शेष दिखाया गया है। कई अन्य जिलों में भी रिकॉर्ड और भौतिक उपलब्धता का मिलान नहीं हो पा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि शेष लेखा मिलान पूरा होने के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

355 केंद्रों का लेखा मिलान अभी बाकी
प्रदेश के 2740 उपार्जन केंद्रों में से अब तक 2385 केंद्रों का लेखा मिलान पूरा हो चुका है, जबकि 355 केंद्रों का मिलान अभी शेष है। सर्वाधिक 69 केंद्र कवर्धा, 47 कांकेर, 42 कोंडागांव, 36 बस्तर, 23 बीजापुर और 17 जशपुर में अभी लेखा परीक्षण बाकी है।

एफआईआर और वसूली की कार्रवाई
सूखत और रिकॉर्ड में अंतर पाए जाने वाले मामलों में संबंधित सहकारी समितियों पर जवाबदेही तय की जा रही है। कई मामलों में समिति प्रबंधकों, ऑपरेटरों और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जिन मामलों में अनियमितता प्रमाणित होगी, वहां नियमानुसार वसूली की कार्रवाई भी की जाएगी।

पिछले साल से कम, लेकिन सवाल बरकरार
मार्कफेड के अनुसार खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में संग्रहण केंद्रों में करीब 1.57 लाख मीट्रिक टन और उपार्जन केंद्रों में लगभग एक लाख मीट्रिक टन धान की कमी सामने आई थी, जिसकी कीमत 500 से 600 करोड़ रुपये आंकी गई थी। अधिकारियों का दावा है कि इस बार रिकॉर्ड में अंतर पिछले वर्ष की तुलना में कम है और कई मामलों में ऑनलाइन प्रविष्टि लंबित होने के कारण भी यह अंतर दिखाई दे रहा है।

क्या कहा मार्कफेड के प्रबंध संचालक ने
मार्कफेड के प्रबंध संचालक जितेंद्र शुक्ला ने इस पूरे मामले में कहा कि प्रदेश के लगभग सभी उपार्जन और संग्रहण केंद्रों से धान का शत-प्रतिशत उठाव सुनिश्चित किया जा चुका है। 2740 में से 2385 केंद्रों का लेखा मिलान पूरा हो गया है। जिन केंद्रों में धान शेष दिख रहा है, वहां या तो धान मौके पर उपलब्ध नहीं है या उठाव के बाद उसकी ऑनलाइन एंट्री नहीं हुई है। शेष केंद्रों का लेखा मिलान भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा।

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