रायपुर। राजधानी रायपुर से प्रदेश और पड़ोसी राज्यों की ओर बस से यात्रा करना पिछले चार महीनों में काफी महंगा हो गया है। भाठागांव अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) से संचालित होने वाली बसों के किराए में 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका सबसे अधिक असर रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों और नौकरी-पेशा लोगों पर पड़ रहा है, जिनका मासिक यात्रा बजट लगातार बढ़ता जा रहा है।
जगदलपुर, नागपुर, अंबिकापुर, रायगढ़, कोंडागांव और बिलासपुर जैसे प्रमुख रूटों पर यात्रियों को पहले की तुलना में 100 से 150 रुपये तक अधिक किराया चुकाना पड़ रहा है। वहीं लंबी दूरी की एसी स्लीपर बसों में किराया कई मार्गों पर लगभग दोगुना तक पहुंच गया है। ट्रेनों में टिकट की कमी और वेटिंग की समस्या के कारण बड़ी संख्या में यात्री बसों का सहारा लेते हैं, लेकिन अब बस यात्रा भी महंगी साबित हो रही है।
बस संचालकों का कहना है कि डीजल की कीमतों, टायर, स्पेयर पार्ट्स, बीमा, परमिट शुल्क, कर्मचारियों के वेतन और बसों के रखरखाव पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में संचालन लागत की भरपाई के लिए किराए में संशोधन करना उनकी मजबूरी बन गया है। उनका कहना है कि यदि समय-समय पर किराए में वृद्धि नहीं की जाए तो बस संचालन आर्थिक रूप से कठिन हो जाएगा।
साधारण बसों के किराए में भी अधिकांश रूटों पर 20 से 100 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। दुर्ग, धमतरी, कांकेर और कोंडागांव जैसे नजदीकी मार्गों पर भी यात्रियों को पहले की तुलना में अधिक किराया देना पड़ रहा है, जबकि जगदलपुर और नागपुर जैसे लंबे रूटों पर किराया 550 से 650 रुपये तक पहुंच गया है।
सबसे अधिक असर लंबी दूरी की एसी स्लीपर सेवाओं पर देखने को मिल रहा है। हैदराबाद, प्रयागराज, वाराणसी, रांची और पुरी जाने वाली बसों में किराए में 350 से 1000 रुपये तक की वृद्धि हुई है। उदाहरण के तौर पर हैदराबाद का किराया, जो पहले लगभग 1800 से 2300 रुपये था, अब कई ट्रैवल्स में 3500 रुपये तक पहुंच चुका है। इसी तरह रांची के लिए 1250 से 1450 रुपये, प्रयागराज के लिए 2800 से 3000 रुपये तथा पुरी के लिए 1350 से 1600 रुपये तक किराया लिया जा रहा है। अलग-अलग ट्रैवल्स ऑपरेटरों के अनुसार इन दरों में कुछ अंतर भी देखा जा रहा है।
रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों का कहना है कि वेतन में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई, लेकिन आने-जाने का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। संजय पाल, नीतू साह और धनीराम जैसे यात्रियों का कहना है कि काम के सिलसिले में अक्सर दूसरे जिलों में जाना पड़ता है। ट्रेन में तत्काल टिकट मिलना मुश्किल होता है, इसलिए बस ही एकमात्र विकल्प बचता है। ऐसे में किराया बढ़ने से मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उनका कहना है कि त्योहारी सीजन और छुट्टियों के दौरान किराए में होने वाली अतिरिक्त बढ़ोतरी से परेशानी और अधिक बढ़ जाती है।


















